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जय सुभाष ....!! जय भारत ......!!

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कहते हैं … इतिहास में रक्त से किये हुए हस्ताक्षर कोई नहीं मिटा सकता ………..बस यही बात नेताजी सुभाष के विषय  में सौ प्रतिशत खरी उतरती है, बस ऐसे ही थे हमारे सुभाष बाबु जिन्होंने अपने श्रम जल से पौरुष पत्रों पर वैभव के छंद लिखे
और परतन्त्रता के घनघोर तिमिर का वक्ष चीरकर स्वतन्त्रता का सूर्य उगाया | नेताजी जी का विश्वास था की जिस दिन हम आत्म बलिदान करना सीख जायेंगे उस दिन स्वतन्त्रता हमसे दूर नहीं होगी,सचमुच उन्होंने हमें आत्म बलिदान करना सिखा दिया |
बेड़ियों में  जकड़ी  मात्रभूमि  की जो पीड़ा सुभाष के मन में थी इसी ने उन्हें समस्त सांसारिक भोगो की तिलांजलि देने पर मजबूर कर दिया |  हमें स्वतन्त्रता तो प्राप्त हुई पर नेताजी गहन अन्धकार में खो गए ……आज हमारा अस्तित्व उन्ही के कारन
है परन्तु एक बात कही न कही मन को विचलित कर देती है और ये सोचने पर मजबूर कर देती है कि काश ….नेहरु समेत समस्त भारतीय नेताओ ने उन्हें सहयोग दिया होता तो भारत आज विश्व का सर्वोच्च अग्रणी राष्ट्र होता,पर ऐसा नहीं हुआ ….और
यह सूर्य अस्त हो गया | यह देश का दुर्भाग्य रहा है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् सत्ता ढोंगी चाटुकारों के हाँथ में चली गई |
अब भी हर भारतवासी को नेता जी पर गर्व है और उनसे बहुत प्रेम भी | यूँ तो हर बार हम उनका जन्म दिन मानते है परन्तु इस बार उनके जन्म दिन पर कुछ कडवी यादे फिर से ताज़ा हो गई है क्योकि,
वर्तमान सरकार ने उनसे जुडी सच्चाई को जनता के सामने लाने का वचन  जो  दिया  है…..  जनता को अपने “नेता” को गुमनामी के अँधेरे में डूबा हुआ कब तक बर्दाश्त करेगी …आखिर इसका जवाब तलाशना  होगा …|
कुछ राजनैतिक व्यक्तित्वों के कारन  नेता जी की ऐसी दशा हुई , अगर इस बात में जरा भी सच्चाई हुई तो देश उन स्वार्थी लोगो को कभी माफ़ न करेगा जिसने हमारा नेता छीन लिया …..शायद उन्होंने अपना मार्ग निष्कंटक करने के लिए ऐसा किया
क्योकि नेताजी के रहते हुए हुए देशवासी देश का नेतृत्व किसी और के हाँथ में कभी नहीं सौंपते | मेरे प्यारे नेता ये सारा देश तुमको बहुत याद करता है, हमें तुम्हारी जरुरत है —
नेताजी आज अगर होते, तो भ्रष्टाचार नहीं होता |
आरक्षण संरक्षण वादी कलुषित व्यापर नहीं होता ||
नेता सुभाष ने थामी गर पतवार देश की होती तो |
सर्वेभवन्तु सुखिनःमिलता कालाबाजार नहीं होता ||

कहते हैं … इतिहास में रक्त से किये हुए हस्ताक्षर कोई नहीं मिटा सकता ………..बस यही बात नेताजी सुभाष के विषय  में सौ प्रतिशत खरी उतरती है, बस ऐसे ही थे हमारे सुभाष बाबु जिन्होंने अपने श्रम जल से पौरुष पत्रों पर वैभव के छंद लिखे  और परतन्त्रता के घनघोर तिमिर का वक्ष चीरकर स्वतन्त्रता का सूर्य उगाया | नेताजी जी का विश्वास था की जिस दिन हम आत्म बलिदान करना सीख जायेंगे उस दिन स्वतन्त्रता हमसे दूर नहीं होगी,सचमुच उन्होंने हमें आत्म बलिदान करना सिखा दिया |

बेड़ियों में  जकड़ी  मात्रभूमि  की जो पीड़ा सुभाष के मन में थी इसी ने उन्हें समस्त सांसारिक भोगो की तिलांजलि देने पर मजबूर कर दिया |  हमें स्वतन्त्रता तो प्राप्त हुई पर नेताजी गहन अन्धकार में खो गए ……आज हमारा अस्तित्व उन्ही के कारन  है परन्तु एक बात कही न कही मन को विचलित कर देती है और ये सोचने पर मजबूर कर देती है कि काश ….नेहरु समेत समस्त भारतीय नेताओ ने उन्हें सहयोग दिया होता तो भारत आज विश्व का सर्वोच्च अग्रणी राष्ट्र होता,पर ऐसा नहीं हुआ ….और यह सूर्य अस्त हो गया | यह देश का दुर्भाग्य रहा है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् सत्ता ढोंगी चाटुकारों के हाँथ में चली गई |

अब भी हर भारतवासी को नेता जी पर गर्व है और उनसे बहुत प्रेम भी | यूँ तो हर बार हम उनका जन्म दिन मानते है परन्तु इस बार उनके जन्म दिन पर कुछ कडवी यादे फिर से ताज़ा हो गई है क्योकि, वर्तमान सरकार ने उनसे जुडी सच्चाई को जनता के सामने लाने का वचन  जो  दिया  है…..  जनता को अपने “नेता” को गुमनामी के अँधेरे में डूबा हुआ कब तक बर्दाश्त करेगी …आखिर इसका जवाब तलाशना  होगा …|  कुछ राजनैतिक व्यक्तित्वों के कारन  नेता जी की ऐसी दशा हुई , अगर इस बात में जरा भी सच्चाई हुई तो देश उन स्वार्थी लोगो को कभी माफ़ न करेगा जिसने हमारा नेता छीन लिया …..शायद उन्होंने अपना मार्ग निष्कंटक करने के लिए ऐसा किया  क्योकि नेताजी के रहते हुए हुए देशवासी देश का नेतृत्व किसी और के हाँथ में कभी नहीं सौंपते | मेरे प्यारे नेता ये सारा देश तुमको बहुत याद करता है, हमें तुम्हारी जरुरत है —

नेताजी आज अगर होते, तो भ्रष्टाचार नहीं होता |
आरक्षण संरक्षण वादी कलुषित व्यापर नहीं होता ||
नेता सुभाष ने थामी गर पतवार देश की होती तो |
सर्वेभवन्तु सुखिनःमिलता कालाबाजार नहीं होता ||



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